अध्याय 111

लेकिन ऐलेन सच में कभी सोई ही नहीं थी।

उसके पीछे से बहुत धीमी-सी सरसराहट की आवाज़ आई, और पल भर में उसकी नस-नस चौंक उठी!

उसने झट से आँखें खोल दीं। अँधेरे में, उसके बिस्तर के पास दो परछाइयाँ पहले से खड़ी थीं—बस कुछ इंच की दूरी पर!

खिड़की से छनकर आती चाँदनी में, एक परछाई के हाथों के बीच तनी हुई रस्सी...

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